जो बीत गयी सो बीत गयी – छोटी कहानी # Hindi Story

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Short Hindi Story – Jo beet gayee so beet gayee

 

जो बीत गयी सो बीत गयी

दो भाई परस्पर बड़े ही स्नेह व सदभाव से रहते थे। एक दिन किसी बात पर दोनों में कहा सुनी हो गयी। बात बढ़ गयी और छोटे भाई ने अपशब्द बोल दिए, जिससे दोनों के बीच दरार पड़ गयी। तब से दोनों अलग – अलग रहने लगे, बातचीत बंद हो गयी। इस तरह कई वर्ष बीत गए।

छोटे भाई की कन्या के विवाह का समय आया तो उसने सोचा, ‘बड़े आखिर बड़े ही है’ जाकर मना लेना चाहिए।

वह बड़े भाई के घर गया और पैरो पर गिरकर बोला : “भैया! मैं अपनी सभी पिछली बातों के लिए छमा चाहता हु। अब आप घर चलिए और विवाह का सब कार्य संभालिये”

पर बड़ा भाई न पसीजा, छोटे को बहुत दुःख हुआ। वह सोच में पड़ गया की ‘बड़े भाई को कैसे मनाया जाय?’ इधर विवाह के थोड़े ही दिन बचे थे, तभी किसी ने बताया की तुम्हारा बड़ा भाई किन्ही सत्संग में जाता है और उनकी आज्ञा मानता हैं।

छोटा भाई संत के चरणों में पंहुचा और सारी बात बताते हुए अपनी भूल की छमा याचना की तथा गहरा पश्चाताप व्यक्त किया। प्रार्थना की : “आप किसी प्रकार भाई को मेरे यहाँ आने के लिए तैयार कर दे।”

दूसरे दिन जब बड़ा भाई सत्संग में गया तो संत बोले: तुम्हारे भाई की कन्या का विवाह है तो तुम क्या कार्य संभाल रहे हो?

“महाराज ! मैं विवाह में सम्मिलित ही नहीं हो रहा हु। कुछ वर्ष पूर्व मेरे छोटे भाई ने मुझे ऐसे कड़वे वचन कहे थे जो आज भी मेरे ह्रदय में कांटे की तरह खटक रहे है।”

” अच्छा ! मैंने गत रविवार को सत्संग में क्या बताया था ?”

“जी मुझे कुछ याद नहीं आ रहा।”

” अच्छी तरह याद करके बताओ।”

प्रयत्न करने पर भी उसे कुछ याद नहीं आया तो संत बोले : “देखो ! सत्संग की बातें तो तुम्हे आठ दिन भी याद नहीं रही और छोटे भाई के कड़वे बोल, जो कई वर्षो पहले कहे गए थे, वे अभी तक ह्रदय में चुभ रहे है। जब तुम उन्हें जीवन में याद नहीं रख सकते तो जीवन मे कैसे उतारोगे और नहीं उतरा तो जीवन कैसे सुधरेगा , जब जीवन नहीं सुधरा तो सत्संग में आने का पूर्ण लाभ कैसे मिलेगा? अतः तुम कल से यहाँ मत आना।”

अब बड़े भाई की आँखे खुली। उसने विचार किया और पाया की वास्तव में मैं ही गलत हु। छोटे ने तो छमा मांग ली है।
जो बीत गयी सो बीत गयी, उसको याद करने से कोई लाभ नहीं।

भुत गुजर चूका है और भविष्य तो वर्तमान होकर आएगा, उसे सवारा जा सकता है ।

उसने संत – चरणों में सर झुकाते हुए कहा : ” गुरुदेव ! मैं समझ गया, आपने मेरे मन का मैल दूर कर दिया है। आपका बड़ा उपकार है। अब मैं केवल अपने छोटे भाई से ही नहीं, अपितु किसी के भी प्रति द्वेषभाव नहीं रखूँगा तथा आपके द्वारा सत्संग में बताये अनुसार आत्मकल्याण के मार्ग पर तत्परता से चलूँगा।

सीख – संसार है बीतने दो। गंभीरता से इसका बीतना देखो। ऐसा करने वाला व्यक्ति परमार्थ के रास्ते अच्छी तरह से तरक्की करता है।

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